माँ हमेशा मेरी यादों मे रहती हैं वैसे दिन मे कई घंटे फ़ोन पर बातें कर लेते हें दोनों जैसे कोई दो सहेलियां हो. सारे संसार में बस एक मेरी माँ हें जो मुझे मुझसे ज्यादा जानती हैं जब भी मे खाना प्लेट मे डालती हूँ हमेशा उनकी याद आती हैं क्यूंकि मुझे कभी पता नहीं चलता मे कितना खा पाऊँगी माँ को हमेशा पता रहता था . वो हमेशा कहती थी कैसे बच्चे पालेगी अपना तो कुछ पता नहीं रहता तुझे. मेरी दोनों बहनों की ढेर साडी सहेलियां थी पर मेरी बहुत कम ना के बराबर बस पुरे दिन माँ का पल्लू पकडे घुमती रहती थी जहाँ माँ वहां मै, शादी के पहले तक माँ से चिपक कर सोती थी माँ कहती थी तू बहुत बड़ी हो गयी हें अब मेरे हाथ पैरो मै दर्द कर देती हें पर माँ के बिना नींद नहीं आती थी हमेशा सोचती थी काश मै लड़का होती तो कहीं नहीं जाना पड़ता मुझे अपना घर छोड़कर, माँ के हाथ का खाना सारे दुनिया मे सबसे ज्यादा स्वादिष्ट लगता हें ऐसा खाना कहीं नहीं होता, जब भी मायके जाती हूँ माँ सारी पसंदीदा चीज़े पहले ही बना के रखती हैं मेरी माँ ममता की मूरत हैं गोरी गोरी एकदम मलाई जैसी ...जब रामायण का पाठ करती थी जबरदस्ती पास बैठाती थी , संस्कृत के श्लोक इत्ती आसानी से पड़ती थी जैसे हिंदी पड़ रही हो ....उन्हें सफाई बहुत पसंद हैं गन्दगी ज़रा भी पसंद नहीं ....सुबह चार बजे ही जग जाती हें माँ और सुबह से सफाई शुरू ...उनके लिए एक गाना बहुत पसंद हें मुझे ...." तू कितनी अच्छी हैं तू कितनी प्यारी हैं भोली भाली हैं ओ माँ मेरी माँ "गुरुवार, 24 जून 2010
माँ की गुडिया
माँ हमेशा मेरी यादों मे रहती हैं वैसे दिन मे कई घंटे फ़ोन पर बातें कर लेते हें दोनों जैसे कोई दो सहेलियां हो. सारे संसार में बस एक मेरी माँ हें जो मुझे मुझसे ज्यादा जानती हैं जब भी मे खाना प्लेट मे डालती हूँ हमेशा उनकी याद आती हैं क्यूंकि मुझे कभी पता नहीं चलता मे कितना खा पाऊँगी माँ को हमेशा पता रहता था . वो हमेशा कहती थी कैसे बच्चे पालेगी अपना तो कुछ पता नहीं रहता तुझे. मेरी दोनों बहनों की ढेर साडी सहेलियां थी पर मेरी बहुत कम ना के बराबर बस पुरे दिन माँ का पल्लू पकडे घुमती रहती थी जहाँ माँ वहां मै, शादी के पहले तक माँ से चिपक कर सोती थी माँ कहती थी तू बहुत बड़ी हो गयी हें अब मेरे हाथ पैरो मै दर्द कर देती हें पर माँ के बिना नींद नहीं आती थी हमेशा सोचती थी काश मै लड़का होती तो कहीं नहीं जाना पड़ता मुझे अपना घर छोड़कर, माँ के हाथ का खाना सारे दुनिया मे सबसे ज्यादा स्वादिष्ट लगता हें ऐसा खाना कहीं नहीं होता, जब भी मायके जाती हूँ माँ सारी पसंदीदा चीज़े पहले ही बना के रखती हैं मेरी माँ ममता की मूरत हैं गोरी गोरी एकदम मलाई जैसी ...जब रामायण का पाठ करती थी जबरदस्ती पास बैठाती थी , संस्कृत के श्लोक इत्ती आसानी से पड़ती थी जैसे हिंदी पड़ रही हो ....उन्हें सफाई बहुत पसंद हैं गन्दगी ज़रा भी पसंद नहीं ....सुबह चार बजे ही जग जाती हें माँ और सुबह से सफाई शुरू ...उनके लिए एक गाना बहुत पसंद हें मुझे ...." तू कितनी अच्छी हैं तू कितनी प्यारी हैं भोली भाली हैं ओ माँ मेरी माँ "मेरा बचपन
मेरे पापा एक बिजनेस मेन होने के साथ साथ राजनीति में भी सक्रिय हैं पर माँ एक सीधी साधी और सुघड़ महिला हैं हम तीन बहनें और दो भाई हैं माँ बताती थी जब में पैदा हुई वो दिवाली की रात थी त्यौहार का दिन था सबने कहा था अरे लछ्मी आई हैं बचपन बहुत शानदार था हमारा दादा दादी और सारे कजिन साथ साथ रहते थे शुरू शुरू में बाद में सब अलग रहने चले गए सबमे में सबसे ज्यादा शैतान थी और मेरा छोटा भाई दीपू, मेरी दोनों बहनें बहुत सीधी थी माँ की तरह माँ के साथ काम में हाथ बटाती थी पर मेरा मन इन सब चीजों में नहीं लगता था माँ जानती थी पर कभी नहीं कहती थी पापा हमेशा बोलते थे इसको भी कुछ सिखाया करो सारा दिन बाहर घुमती हैं पढाई में ठीक थी और अच्छे नम्बरों से पास होती थी जब स्कूल जाया करते थे तो सारे रास्ते इमली के लड्डू खाते जाते थे बड़े अच्छे दिन थे वो जब दादी के साथ गाँव जाते थे सारा दिन ट्यूबैल में मस्ती करते थे गाँव में मै बहुत दादागिरी करती थी सारे बच्चो को इकठ्ठा कर आम के बाग़ मे हरिया डंडा खेलते थे और बच्चे अपने घरो से खाना लाते थे .....दादी के पास जब कोई शिकायत करता था आके तो दादी फिर थोड़ी गुस्सा किया करती थी ...दादी दिल की बुरी नहीं थी हम सबको बहुत प्यार करती थी शायद कस्बो की मानसिकता से डरती थी शायद ...
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