गुरुवार, 24 जून 2010
मेरा बचपन
मेरे पापा एक बिजनेस मेन होने के साथ साथ राजनीति में भी सक्रिय हैं पर माँ एक सीधी साधी और सुघड़ महिला हैं हम तीन बहनें और दो भाई हैं माँ बताती थी जब में पैदा हुई वो दिवाली की रात थी त्यौहार का दिन था सबने कहा था अरे लछ्मी आई हैं बचपन बहुत शानदार था हमारा दादा दादी और सारे कजिन साथ साथ रहते थे शुरू शुरू में बाद में सब अलग रहने चले गए सबमे में सबसे ज्यादा शैतान थी और मेरा छोटा भाई दीपू, मेरी दोनों बहनें बहुत सीधी थी माँ की तरह माँ के साथ काम में हाथ बटाती थी पर मेरा मन इन सब चीजों में नहीं लगता था माँ जानती थी पर कभी नहीं कहती थी पापा हमेशा बोलते थे इसको भी कुछ सिखाया करो सारा दिन बाहर घुमती हैं पढाई में ठीक थी और अच्छे नम्बरों से पास होती थी जब स्कूल जाया करते थे तो सारे रास्ते इमली के लड्डू खाते जाते थे बड़े अच्छे दिन थे वो जब दादी के साथ गाँव जाते थे सारा दिन ट्यूबैल में मस्ती करते थे गाँव में मै बहुत दादागिरी करती थी सारे बच्चो को इकठ्ठा कर आम के बाग़ मे हरिया डंडा खेलते थे और बच्चे अपने घरो से खाना लाते थे .....दादी के पास जब कोई शिकायत करता था आके तो दादी फिर थोड़ी गुस्सा किया करती थी ...दादी दिल की बुरी नहीं थी हम सबको बहुत प्यार करती थी शायद कस्बो की मानसिकता से डरती थी शायद ...
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